सरस्वती ओमँ शान्ती
कह गए सिया से, ऐसा कलयुग आएगा...✍️*
*इंसान चेहरे से अपना होगा, दिल से पराया हो जाएगा।*
*हंसता चेहरा दिखेगा सबका, दिल में दर्द छुपाएगा।*
*सच्चाई भूखी सोएगी, झूठ महल बनाएगा।।*
*नेक इंसान रोता रहेगा, पापी मौज उड़ाएगा....*
*ज्ञानी बैठा मौन रहेगा, मूर्ख शोर मचाएगा!!!*
*धर्म खड़ा बाजार में बिकेगा, अधर्म सिंहासन पाएगा।*
*अपने होगे बेगाने ,पराया अपना बन जाएगा।*
*स्वार्थ की इस आंधी में प्रेम कही छिप जाएगा..!!*
*जिसके पास पैसा होगा, उसका झूठा भी सच कहलाएगा।*
*गरीब अगर सच बोल दे तो झूठ कहलाएगा!*
*मां-बाप घर में रोते होंगे ,बेटा दुनिया सजाएगा।*
*मोबाइल में रिश्ते ढूंढेगा, अपनों से दूर हो जाएगा।*
*चेहरे पर सब प्यार दिखाएंगे, दिल में हिसाब लगाएंगे।*
*वक्त पड़ेगा जब इंसान पर अपने ही नजरे चुराएंगे।*
*मतलब खत्म होते हैं रिश्ते भी खत्म हो जाएंगे।*
*झूठ महल बनाएगा।*
*ऐसा कलयुग आएगा*
*इंसान इंसान से डर जाएगा....!!🌷* #🙏गुरु महिमा😇