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#संत श्री आशारामजी बापू #📿संतवाणी 🗣️ #🙏🏻🌸आध्यात्मिक बाते😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 ##भक्ति
संत श्री आशारामजी बापू - बापूजी का संदेश  पूज्य संत श्री आशारामजी बापू हस्तिनापुर गए, श्रीकृषगके ब्वशगंति मूँछ ष्ननकभो हस्नरा फुरीमती जब शांति दूत बनकर भगवान मेवे दुर्योधन परोसे थे। लेकिन के मन में अहंकार था, प्रेम दुर्योधन की कमी थी इसलिए भगवान ने उसके राजसी भोजन को ठुकरा दिया और वहां से सीधे अपने परम भक्त महात्मा বরিত্ব তী एक साधारण जीवन जीते विदुर के घर चले गए। पत्नी विदुरानीजी ने प्रभु को थे। वहाँ विदुरजी की साग और रोटी बड़े ही प्रेम से खिलाया।  ೩೯ 737 ऐसे खाया जैसे वे संसार के सबसे स्वादिष्ट पकवान हों। यह प्रसंग हमें याद दिलाता है कि ईश्वर को प्रसन्न करने के किसी बड़ी संपत्ति या आयोजन की आवश्यकता लिए नहीं है; बस एक साफ मन और सच्चा प्रेम ही काफी है। बापूजी का संदेश  पूज्य संत श्री आशारामजी बापू हस्तिनापुर गए, श्रीकृषगके ब्वशगंति मूँछ ष्ननकभो हस्नरा फुरीमती जब शांति दूत बनकर भगवान मेवे दुर्योधन परोसे थे। लेकिन के मन में अहंकार था, प्रेम दुर्योधन की कमी थी इसलिए भगवान ने उसके राजसी भोजन को ठुकरा दिया और वहां से सीधे अपने परम भक्त महात्मा বরিত্ব তী एक साधारण जीवन जीते विदुर के घर चले गए। पत्नी विदुरानीजी ने प्रभु को थे। वहाँ विदुरजी की साग और रोटी बड़े ही प्रेम से खिलाया।  ೩೯ 737 ऐसे खाया जैसे वे संसार के सबसे स्वादिष्ट पकवान हों। यह प्रसंग हमें याद दिलाता है कि ईश्वर को प्रसन्न करने के किसी बड़ी संपत्ति या आयोजन की आवश्यकता लिए नहीं है; बस एक साफ मन और सच्चा प्रेम ही काफी है। - ShareChat