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#☝अनमोल ज्ञान #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #❤️जीवन की सीख
☝अनमोल ज्ञान - समर्पण विशेष समाचार Il সম সানা নী Il সাথো श्रद्धा जयपुर के तपिश సా गुर्जर १४०वीं बार किए माता के दर्शन अटरूट आस्था , असीम विश्वास और मां वैष्णो देवी के प्रति अनन्य प्रेम की मिसाल जयपुर , राजस्थान ন जयपुर , राजस्थान के रहने वाले तपिश Tok माता वैष्णो देवी के प्रति अपनी अट्रूट श्रद्घा और समर्पण का अन्ययुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने अब तक १४० बार पेदल यात्रा कर माता के दरबार में हाजिरी लगाई है। नानी ने दिखाया माता का रास्ता ন্রাং সপনী নানী तपिश बताते हैं कि वे पहली के साथ माता वैष्णो देवी की यात्रा पर गए थे। उसी दिन से माता के दरबार ने उन्हें अपनी ओर खींच लिया। तपिश कहते हैं " मुझे मेरी नानी ही माता के दरबार तक लेकर गई थीं, उन्होंनें ही मुझे সানা কা যামা নিম্ত্রামা | 140 २०११ से नियमित पैदल यात्रा तपिश गुर्जर वर्ष २००६ में पहली बार माता बार पैदल यात्रा वैष्णो देवी के दर्शन के लिए गए थे। २०११ से সানা ক বতৌ স उन्होंने नियमित रूप से हर वर्ष कई बार पैदल समरपित यात्रा करना शुरू किया। अब तक कुल १४० यात्राऐं पूरी कर चुके हैं, वह भी सिर्फ पैदल मार्ग से। आस्था की अद्मुत यात्रा संकल्प और समर्पण तपिश गुर्जर ने कहा का मानना हें कि जब भी तपिश శా 2006 पहली गुर्जर यात्रा जीवन में कोई परेशानी या उलझन होती है, নিমসিন যরান্সা সাঁসে 2011 ६६  यह कोई रिकांर्ड नहीं, यह तो हैं। बे कहते हैं कि बुलाती माता खुद १४० (सभी पैदल) यात्राऐं मेरी मां के प्रति प्रेम है। माता कुल माता के दरबार में जाकर जो शांति मिलती है, निवासी : जयपुर , राजस्थान ने ही सब कुछ दिया है, मैं तो वह कहीं और नहीं मिल सकती | সানা ক সনি সাননা  बस उनका बुलावा आने पर भीड, मौसम, कठिन चढ़ाई ~ कुछ भी "मुझे बस मेरी माता से प्यार है " चला जाता हूं। 99 उनकी आस्था को डिगा नहीं पाया। के लिए प्रेरणा युवाओं  माता वैष्णो देवी का दरबार सब पर कृपा तपिश गुर्जर की यह यात्रा सिर्फ करता है॰ बस सच्चे मन से एक बार एक व्यवितता उपलब्धि नहीं आवाज देकर तो देखो , बुलावा जरूर आता है। बल्कि यह हम सभी के लिए आस्था , थैर्य, अनुशासन और गुर्जर নণিহ समर्पण की प्रेरणा हे। जिय माता टी समर्पण विशेष समाचार Il সম সানা নী Il সাথো श्रद्धा जयपुर के तपिश సా गुर्जर १४०वीं बार किए माता के दर्शन अटरूट आस्था , असीम विश्वास और मां वैष्णो देवी के प्रति अनन्य प्रेम की मिसाल जयपुर , राजस्थान ন जयपुर , राजस्थान के रहने वाले तपिश Tok माता वैष्णो देवी के प्रति अपनी अट्रूट श्रद्घा और समर्पण का अन्ययुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने अब तक १४० बार पेदल यात्रा कर माता के दरबार में हाजिरी लगाई है। नानी ने दिखाया माता का रास्ता ন্রাং সপনী নানী तपिश बताते हैं कि वे पहली के साथ माता वैष्णो देवी की यात्रा पर गए थे। उसी दिन से माता के दरबार ने उन्हें अपनी ओर खींच लिया। तपिश कहते हैं " मुझे मेरी नानी ही माता के दरबार तक लेकर गई थीं, उन्होंनें ही मुझे সানা কা যামা নিম্ত্রামা | 140 २०११ से नियमित पैदल यात्रा तपिश गुर्जर वर्ष २००६ में पहली बार माता बार पैदल यात्रा वैष्णो देवी के दर्शन के लिए गए थे। २०११ से সানা ক বতৌ স उन्होंने नियमित रूप से हर वर्ष कई बार पैदल समरपित यात्रा करना शुरू किया। अब तक कुल १४० यात्राऐं पूरी कर चुके हैं, वह भी सिर्फ पैदल मार्ग से। आस्था की अद्मुत यात्रा संकल्प और समर्पण तपिश गुर्जर ने कहा का मानना हें कि जब भी तपिश శా 2006 पहली गुर्जर यात्रा जीवन में कोई परेशानी या उलझन होती है, নিমসিন যরান্সা সাঁসে 2011 ६६  यह कोई रिकांर्ड नहीं, यह तो हैं। बे कहते हैं कि बुलाती माता खुद १४० (सभी पैदल) यात्राऐं मेरी मां के प्रति प्रेम है। माता कुल माता के दरबार में जाकर जो शांति मिलती है, निवासी : जयपुर , राजस्थान ने ही सब कुछ दिया है, मैं तो वह कहीं और नहीं मिल सकती | সানা ক সনি সাননা  बस उनका बुलावा आने पर भीड, मौसम, कठिन चढ़ाई ~ कुछ भी "मुझे बस मेरी माता से प्यार है " चला जाता हूं। 99 उनकी आस्था को डिगा नहीं पाया। के लिए प्रेरणा युवाओं  माता वैष्णो देवी का दरबार सब पर कृपा तपिश गुर्जर की यह यात्रा सिर्फ करता है॰ बस सच्चे मन से एक बार एक व्यवितता उपलब्धि नहीं आवाज देकर तो देखो , बुलावा जरूर आता है। बल्कि यह हम सभी के लिए आस्था , थैर्य, अनुशासन और गुर्जर নণিহ समर्पण की प्रेरणा हे। जिय माता टी - ShareChat