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#🌅🌻‼️શુપ્રભાતમ્‼️🌻🌄 #🙏 ભક્તિ & ધર્મ #સુભાષિત
🌅🌻‼️શુપ્રભાતમ્‼️🌻🌄 - श्रुतं प्रज्ञानुगं यस्य प्रज्ञा चैव श्रुतानुगा। असम्भित्रायेमर्यादः पण्डिताख्यां लभेत सः Il जो व्यक्ति गंथों-शास्त्रों से विद्या ग्रहण कर उसी के अनुरूप अपनी बुद्धि को ढलता है और अपनी बुद्धि का प्रयोग उसी प्राप्त विद्या के अनुरूप ही करता है तथा जो सज्जन की मर्यादा पुरुषों ` का कभी उल्लंघन नहीं करता , वही ज्ञानी है | शुप्रभातम् श्रुतं प्रज्ञानुगं यस्य प्रज्ञा चैव श्रुतानुगा। असम्भित्रायेमर्यादः पण्डिताख्यां लभेत सः Il जो व्यक्ति गंथों-शास्त्रों से विद्या ग्रहण कर उसी के अनुरूप अपनी बुद्धि को ढलता है और अपनी बुद्धि का प्रयोग उसी प्राप्त विद्या के अनुरूप ही करता है तथा जो सज्जन की मर्यादा पुरुषों ` का कभी उल्लंघन नहीं करता , वही ज्ञानी है | शुप्रभातम् - ShareChat