साँस साँस से देह है,वर्ना मिट्टी राख।
सुनी पढ़ी बातें नही , खुद की देखी आँख।।
खुद की देखी आँख, आँख को जलते देखा।
कान अधर औ हाथ,.जले किस्मत की रेखा।।
प्रेम रूप आधार , हो सबका सत्यानाश।
प्रिय होते बेकार , नहीं जब देह में साँस।। #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #कविता #📚कविता-कहानी संग्रह #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #✍मेरे पसंदीदा लेखक


