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#📖भगवतगीता🚩
📖भगवतगीता🚩 - गीता में पाप और पुण्य का रहस्य श्रीमद्भगवद्नीता के अनुसार पाप और पुण्य कर्म से नहीं, बल्कि उसकी भावना से तय होते हैं। स्वार्थ और अहंकार से किया गया कर्म पाप है॰ जबकि निस्वार्थ और धर्मपूर्वक किया गया कर्म पुण्य है। गीता में पाप और पुण्य का रहस्य श्रीमद्भगवद्नीता के अनुसार पाप और पुण्य कर्म से नहीं, बल्कि उसकी भावना से तय होते हैं। स्वार्थ और अहंकार से किया गया कर्म पाप है॰ जबकि निस्वार्थ और धर्मपूर्वक किया गया कर्म पुण्य है। - ShareChat