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#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - आज का अमृत Astrofriend Naresh Chand 7ns सिर राखिये, गुरु को चलिये आज्ञा माहिं। कहैं कबीर ता दास को, तीन लोकों भय नाहिंIl अपना सिर मुकुट मानकर, उसकी आज्ञा मैं चलो। अर्थ( गुरु को कबीर साहिब कहते हैं, ऐसे शिष्य सेवक को तनों लोकों से भय नहीं है | आज का अमृत Astrofriend Naresh Chand 7ns सिर राखिये, गुरु को चलिये आज्ञा माहिं। कहैं कबीर ता दास को, तीन लोकों भय नाहिंIl अपना सिर मुकुट मानकर, उसकी आज्ञा मैं चलो। अर्थ( गुरु को कबीर साहिब कहते हैं, ऐसे शिष्य सेवक को तनों लोकों से भय नहीं है | - ShareChat