#बहराइच ब्रेकिंग#
# तीन दिनों के अन्दर शिक्षक दम्पति की मौत से क्षेत्र में सनसनी#
उत्तर प्रदेश के
शिक्षक दंपत्ति की संदिग्ध मौत से सनसनी, 3 दिन में पति-पत्नी की मौत से उठे कई सवाल...
लखनऊ/बहराइच/श्रावस्ती:
उत्तर प्रदेश में एक शिक्षक दंपत्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने सनसनी फैला दी है। बहराइच और श्रावस्ती में तैनात इस दंपत्ति की मौत महज तीन दिनों के भीतर होने से मामला और भी रहस्यमय हो गया है। पुलिस ने पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है और इसे पारिवारिक विवाद व दहेज उत्पीड़न के एंगल से भी देखा जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, जितेंद्र गोयल (पति), जो बहराइच में तैनात थे, और उनकी पत्नी पिंकी सिंघल उर्फ पूजा, जो श्रावस्ती में कार्यरत थीं, मूल रूप से आगरा के जगदीशपुरा क्षेत्र के रहने वाले थे। दोनों की शादी वर्ष 2020 में हुई थी।
पहले पत्नी की मौत
बताया जा रहा है कि 22 अप्रैल 2026 को पत्नी पिंकी की आगरा स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया।
फिर पति की भी मौत
पत्नी की मौत के महज तीन दिन बाद, 23/24 अप्रैल की रात पति जितेंद्र गोयल का शव लखनऊ के एक होटल में मिला। बताया जा रहा है कि उन्होंने भी फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। इस दूसरी घटना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
दहेज का आरोप और केस दर्ज
पत्नी की मौत के बाद मायके पक्ष ने जितेंद्र गोयल, उनकी मां और पिता के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही पिंकी को प्रताड़ित किया जा रहा था।
परिवार का दावा
वहीं, जितेंद्र के परिवार का कहना है कि दहेज के आरोपों और दर्ज एफआईआर के दबाव में आकर जितेंद्र मानसिक तनाव में थे, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।
पुलिस जांच जारी
पुलिस ने दोनों घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कॉल डिटेल्स और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। गृह कलह, मानसिक तनाव और दहेज उत्पीड़न समेत सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है।
बड़ा सवाल
लगातार दो मौतों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह महज पारिवारिक विवाद का मामला है या इसके पीछे कोई और कारण छिपा है ? सच्चाई का खुलासा अब पुलिस जांच के बाद ही कर पाती है अथवा अन्य कई मामलों की तरह शिक्षको के मौत का मामला अबूझ पहेली बन कर रह जाता है।
#बहराइच से डी कान्त की रिपोर्ट#


