( royal challengers Bengaluru ) हे समय, हे समय, तुम मुझे कहाँ ले जा रहे हो? राजा मर रहा है, फिर भी तुम हाथ जोड़े खड़े बस देख रहे हो। क्या मेरे जीवन का मूल उद्देश्य ही मुझसे दूर छिटक रहा है? क्या वह वीर तलवार सड़कों पर यूं ही लावारिस पड़ी है, लपटों में घिरी हुई? इस संग-साथ से विहीन जीवन में, तुम्हारी आवाज़ ही मेरा एकमात्र साथी बने; लौट आओ! इस चंचल भीड़ के बीच, केवल तुम्हारा नाम ही शाश्वत है; उठो! उठो! तुम्हारे बिना इस दुनिया में, मैं कहाँ जाऊँ? लौट आओ! उठो! लौट आओ... उठो! जब धरती पर वर्षा होती है, तो क्या वह पहाड़ों को भी ऊपर उठने पर विवश नहीं कर देती? जिस जंगल में कभी वह शक्तिशाली बाघ बेखौफ़ घूमता था—क्या यह वही कहानी है जहाँ बाघ अपने साम्राज्य को पुनः पाने के लिए लौटता है? क्या सचमुच, मैं ही वह राजा हूँ? क्या अब मेरे भीतर एक righteous fury (न्यायपूर्ण क्रोध) की अग्नि प्रज्वलित हो रही है? क्या वह उमड़ता हुआ बैर अब अपने अंत की ओर बढ़ रहा है? जिस युद्धभूमि को मैंने कभी त्याग दिया था, क्या अब उसमें एक सिंह का प्रवेश हो रहा है? उठो... उठो! #RCB FAN CLUB #2026 #ipl #winner 🏆🏆



