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#खुद को समझने की जंग चल रही है—कभी शांत, कभी चंचल, कभी भोली तो कभी शातिर। इश्क भी गहरा है और बैर भी, मिज़ाज हर दिन बदलता है। अब धीरे-धीरे अपने हर रंग को अपनाना सीख रही हूँ 🌸# #📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार
📒 मेरी डायरी - सबसे मुश्किल है खुदको समझना हैमैशाखु कुछ दिनों पर ೯ हो जाती कुछ दिनों पर अमर कर आती मोह धैर्य इतना की सब నTTడ की सब गलतियाँ बेझिझक चंचल इतनी करूँ इश्क इतना है की समुंदर भी ओछा लगता 3 बैर ऐसा की फिर एक एक शब्द आँखों में खटकता है अलगाव में भी माहिर हूँ किसी दिन एकदम भोली किसी दिन बहुत शातिर हँ खुदसे ही एक अजीब सी जंग है फाल्गुन से भी ज्यादा मेरे मिजाज में रंग है कुछ दिनों से अब जानने पर ध्यान खुदको देने लगी हँ गुलाब के साथ जो काँटे है मुझमें उन्हें अब लगी हूँ | सर आँखों पर Khamoshsakshi सबसे मुश्किल है खुदको समझना हैमैशाखु कुछ दिनों पर ೯ हो जाती कुछ दिनों पर अमर कर आती मोह धैर्य इतना की सब నTTడ की सब गलतियाँ बेझिझक चंचल इतनी करूँ इश्क इतना है की समुंदर भी ओछा लगता 3 बैर ऐसा की फिर एक एक शब्द आँखों में खटकता है अलगाव में भी माहिर हूँ किसी दिन एकदम भोली किसी दिन बहुत शातिर हँ खुदसे ही एक अजीब सी जंग है फाल्गुन से भी ज्यादा मेरे मिजाज में रंग है कुछ दिनों से अब जानने पर ध्यान खुदको देने लगी हँ गुलाब के साथ जो काँटे है मुझमें उन्हें अब लगी हूँ | सर आँखों पर Khamoshsakshi - ShareChat