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अगर तू मेरा होता... तो भरी भीड़ मे, मै यूँ ना अकेला होता... मैंने भर्म रखा है तेरी झुठी बातों... मालूम तो मुझको भी मतलबी शख्स किसी का नहीं होता.... मै सर उठा कर चलता ग़र वो किसी एक का होता... मसला बस ये है उस शख्स के साथ,, वो जिसका होता है. वो कही का नहीं होता.. #✍मेरे पसंदीदा लेखक #💝 शायराना इश्क़ #📚कविता-कहानी संग्रह #💓 मोहब्बत दिल से #💔दर्द भरी कहानियां
✍मेरे पसंदीदा लेखक - अगर तू मेरा होता.. भीड़ मे, मै यूँ ना अकेला होता... ಖ मैंने भरम रखा है तेरी झुठी बातों. . मालूम तो मुझको भी है मतलबी शख्स किसी का नहीं होता. मै सर उठा कर चलता ग़र वो किसी एक का होता.. बस ये है उस शख्स के साथ , मसला वो जिसका होता है. वो कही का नहीं होता.. अज़नबी लेखक From Notes अगर तू मेरा होता.. भीड़ मे, मै यूँ ना अकेला होता... ಖ मैंने भरम रखा है तेरी झुठी बातों. . मालूम तो मुझको भी है मतलबी शख्स किसी का नहीं होता. मै सर उठा कर चलता ग़र वो किसी एक का होता.. बस ये है उस शख्स के साथ , मसला वो जिसका होता है. वो कही का नहीं होता.. अज़नबी लेखक From Notes - ShareChat