ShareChat
click to see wallet page
search
#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम)
सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) - सनातन परंपरा आदिकाल से ही अन्य परंपराओं से महान इसलिए रही है कि इसके अनुयाइयों ने इसकी मर्यादा को प्रभावित करने वालों को गुणों की कसौटी पर रखा ! देव , दानव अथवा मानव सभी को उनके कर्मों के आधार पर स्थापित किया ! कर्मानुसार ही रावण ,कंस , नारद वशिष्ट , वाल्मिकी बुद्ध इंद्र चंद्र आदि सबको पुरस्कृत , दंडित एवं बहिष्कृत करने का विधान किया ! लेकिन अफसोस कि आज के सनातनी लोग गुण नहीं जाति को प्रथम मानने लगे हैं ! सनातन परंपरा आदिकाल से ही अन्य परंपराओं से महान इसलिए रही है कि इसके अनुयाइयों ने इसकी मर्यादा को प्रभावित करने वालों को गुणों की कसौटी पर रखा ! देव , दानव अथवा मानव सभी को उनके कर्मों के आधार पर स्थापित किया ! कर्मानुसार ही रावण ,कंस , नारद वशिष्ट , वाल्मिकी बुद्ध इंद्र चंद्र आदि सबको पुरस्कृत , दंडित एवं बहिष्कृत करने का विधान किया ! लेकिन अफसोस कि आज के सनातनी लोग गुण नहीं जाति को प्रथम मानने लगे हैं ! - ShareChat