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#आठवणीतील गाणी-कविता. #🎶सदाबहार गाणी🎶 #🎶मराठी गाणी
आठवणीतील गाणी-कविता. - वृक्षवल्ली आम्हा सोयरी वनचरे आळवीती।| पक्षीही सुस्वरे येणे सुखे रुचे एकांताचा बास।  नाही गुणदोष अंगा येत। | OBhatehandua 9 OPingale मंडप पृथिवी आसन। सकश रमे तेथे मन क्रीडा करी।। कथाकर्मंडलू देहउपचारा। जाणवितो वारा अवसरू। | हरिकथा भोजन पखडि विस्तार। करोनि प्रकार सेवू रूची। । तुका म्हणे होय मनासी संवाद आपुलाचि वाद आपणांसी। | संत तुकाराम महाराज वृक्षवल्ली आम्हा सोयरी वनचरे आळवीती।| पक्षीही सुस्वरे येणे सुखे रुचे एकांताचा बास।  नाही गुणदोष अंगा येत। | OBhatehandua 9 OPingale मंडप पृथिवी आसन। सकश रमे तेथे मन क्रीडा करी।। कथाकर्मंडलू देहउपचारा। जाणवितो वारा अवसरू। | हरिकथा भोजन पखडि विस्तार। करोनि प्रकार सेवू रूची। । तुका म्हणे होय मनासी संवाद आपुलाचि वाद आपणांसी। | संत तुकाराम महाराज - ShareChat