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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - # पर   गुलाब रखते 377  7<7 గ్గే सब अपने चेहरों पे दोहरी नक़ाब रखते हैं पाओगे 7 HS बुझा चराग़ कर 7 घर में कई आफ़्ताब रखते हैं 3147 हम बहुत से लोग किजो हर्फ़-्आशना भी नहीं इसी में ख़ुश हैं कि तेरी किताब रखते हैं ये मय-्कदा है वो मस्जिद है वो है बुत-ख़ाना फ़रिश्ते हिसाब रखते भी जाओ గ్గే कहीं #R چ & R शहर पाएँगे 7 यहाँ के लोग तो आँखों में ख़्वाब रखते हैं  # पर   गुलाब रखते 377  7<7 గ్గే सब अपने चेहरों पे दोहरी नक़ाब रखते हैं पाओगे 7 HS बुझा चराग़ कर 7 घर में कई आफ़्ताब रखते हैं 3147 हम बहुत से लोग किजो हर्फ़-्आशना भी नहीं इसी में ख़ुश हैं कि तेरी किताब रखते हैं ये मय-्कदा है वो मस्जिद है वो है बुत-ख़ाना फ़रिश्ते हिसाब रखते भी जाओ గ్గే कहीं #R چ & R शहर पाएँगे 7 यहाँ के लोग तो आँखों में ख़्वाब रखते हैं - ShareChat