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क़ुर्बतें होते हुए भी फ़ासलों में क़ैद हैं कितनी आज़ादी से हम अपनी हदों में क़ैद हैं कौन सी आँखों में मेरे ख़्वाब रौशन हैं अभी किस की नींदें हैं जो मेरे रतजगों में क़ैद हैं पाँव में रिश्तों की ज़ंजीरें हैं दिल में ख़ौफ़ की ऐसा लगता है कि हम अपने घरों में क़ैद हैं शहर आबादी से ख़ाली हो गए ख़ुश्बू से फूल और कितनी ख़्वाहिशें हैं जो दिलों में क़ैद हैं #💝 शायराना इश्क़ #माशूका 💘 #💞दिल की धड़कन
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