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#✡️शनी दोष उपाय💫 #🙏शनि जयंतीच्या शुभेच्छा🌷 #😇भक्तांचा शनिदेव #🌹☕गुड मॉर्निंग Special☕🌹
✡️शनी दोष उपाय💫 - शनि अमावस्या पर एक दीपक चुपचाप यहां लगाकर आ जाएं সমল ৪ী সক্কন ট হানি নৈ   ৫ १६ मई २०२६, शनिवार के दिन शनि अमावस्या और वट अमावस्या @ 37 संयोग बन रहा हे। शास्त्रों में माना जाता हे সম্েন दुर्लभ  क दिन शनि उपासना, दीपदान और पवित्र के नीचे किएं गए उपाय वृक्षों जीवन बाधाओं को शांत करने में विशेय फलदायी होते हैं। वर्तमान समय में शनि देव मीन राशि में गोचर कर रहे है॰ इसलिए जिन लोगों पर साढ़ेसाती, हेया, शनि दोष मानसिक तनाव, आर्थिक संकट या बारबार का्यों में रुकावटें चल रही हे॰ उनके लिए यह उपाय अत्यंत लाभकारी माना जा रहा हे। संध्या के समय तीन गोल बाटी शनिवार वाले दीपक तैयार करें। इन दीपकों मे सरसों  का तेल डालें ओर प्रत्येक दीपक र्मे ११ काले মমৌ तिल के दाने अर्पित करें। काले तिल डालते గగా समय श्रद्घा के साथ यह मंत्र बोलते र्हे ऊँ शं शनैश्वराय नमः ।। 1 इसके बाद इन दीपकों को शमी वृक्षः पीपल वृक्ष  या वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की m ( जड शारत्रों में शमी वृक्षको शनि देव का प्रिय वृक्ष माना गया हे  361 पीपल वृक्ष को दिव्य ऊर्जा ओर शनि कृपा  ননাণা गया हे॰ वही चट वृक्ष मे त्रिदेव का चास माना जाता हे। आप श्रद्घा के अनुसार इन तीनों में॰से किसी एक पीपल वृक्ष में दीपक लगा सकते हे। यदि इच्छा होतो शमी वृक्ष  वृक्ष बट वृक्ष मेंशी दीपदान कर सकते हें। নীনী  (बरगद  वृक्षों  दीपक लगाने के बाद शनि देव से प्रार्थना करें कि जीवन के TITT . संकट   बाधाएँ ओर नकारात्मकता दूर हो तथा भय ঘ में सुख, शांति और स्थिरता वनी रहे। माना जाता हे कि शनि अमावस्या पर श्रद्घा सेकिया गया यह दीपदान व्यत्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा ओर कर्गों में शुभता लाने का कार्य करता हे। शनि अमावस्या पर एक दीपक चुपचाप यहां लगाकर आ जाएं সমল ৪ী সক্কন ট হানি নৈ   ৫ १६ मई २०२६, शनिवार के दिन शनि अमावस्या और वट अमावस्या @ 37 संयोग बन रहा हे। शास्त्रों में माना जाता हे সম্েন दुर्लभ  क दिन शनि उपासना, दीपदान और पवित्र के नीचे किएं गए उपाय वृक्षों जीवन बाधाओं को शांत करने में विशेय फलदायी होते हैं। वर्तमान समय में शनि देव मीन राशि में गोचर कर रहे है॰ इसलिए जिन लोगों पर साढ़ेसाती, हेया, शनि दोष मानसिक तनाव, आर्थिक संकट या बारबार का्यों में रुकावटें चल रही हे॰ उनके लिए यह उपाय अत्यंत लाभकारी माना जा रहा हे। संध्या के समय तीन गोल बाटी शनिवार वाले दीपक तैयार करें। इन दीपकों मे सरसों  का तेल डालें ओर प्रत्येक दीपक र्मे ११ काले মমৌ तिल के दाने अर्पित करें। काले तिल डालते గగా समय श्रद्घा के साथ यह मंत्र बोलते र्हे ऊँ शं शनैश्वराय नमः ।। 1 इसके बाद इन दीपकों को शमी वृक्षः पीपल वृक्ष  या वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की m ( जड शारत्रों में शमी वृक्षको शनि देव का प्रिय वृक्ष माना गया हे  361 पीपल वृक्ष को दिव्य ऊर्जा ओर शनि कृपा  ননাণা गया हे॰ वही चट वृक्ष मे त्रिदेव का चास माना जाता हे। आप श्रद्घा के अनुसार इन तीनों में॰से किसी एक पीपल वृक्ष में दीपक लगा सकते हे। यदि इच्छा होतो शमी वृक्ष  वृक्ष बट वृक्ष मेंशी दीपदान कर सकते हें। নীনী  (बरगद  वृक्षों  दीपक लगाने के बाद शनि देव से प्रार्थना करें कि जीवन के TITT . संकट   बाधाएँ ओर नकारात्मकता दूर हो तथा भय ঘ में सुख, शांति और स्थिरता वनी रहे। माना जाता हे कि शनि अमावस्या पर श्रद्घा सेकिया गया यह दीपदान व्यत्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा ओर कर्गों में शुभता लाने का कार्य करता हे। - ShareChat