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##@જ્યોતિષ - વાસ્તુશાસ્ત્ર (#@મહેશ કુમાર ભટ્ટ) #મહેશ કુમાર ભટ્ટ (સનાતન હિન્દુ ધર્મ MHS) ##@મહેશ કુમાર ભટ્ટ (હિન્દુ દેવી દેવતા) #મહેશ ભટ્ટ (હિન્દુ દેવી દેવતા) #સનાતન હિન્દુ ધર્મ (મહેશ કુમાર ભટ્ટ)
#@જ્યોતિષ - વાસ્તુશાસ્ત્ર (#@મહેશ કુમાર ભટ્ટ) - धूपन्दोप का 35 शास्त्रीय महत्व एवं दीपक की दिशा-विधि Yrl दीपज्योतिः परं ब्रह्म, दीपज्योतिर्जनार्दनः II तमसो मा ज्योतिर्गमय। ऊँ " हे प्रभु ! हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। शास्त्रीय निष्कर्ष दीपक की दिशा का महत्व दीपक को सीधे भूमि पर न रखें। दीपो धनदः स्यादुङमुखः प्राइमुखो आयुः हानिदो दक्षिणामुखः II प्रत्यङमुखो दुःखदोडसौ  दीपक को पात्र, दीपाधार अथवा  अक्षत पर स्थापित करें । दीपक उत्तरमुखी दीपक भूमि से कम से कम समद्धि एवं থন फाम सेफम अंगुल ऊपर हो। चार মামাদম সনান JVFk 471 কানা देवता के दाहिने घृतदीप  பபபபசி तथा तैलदीप बाई ओर रखें। N पूर्वमुखी दीपक दीपक देवकार्य में पूर्व या उत्तररमुखी दीपक रखें।  आयु. आराग्य Tu wd W पवतज पितृकार्य में दक्षिणमुखी दीपक रखें । দানমিকামনং সলাচ का कारण m  ' दीप दोनों का प्रयोग  সানাোঘাঃ धूप एवं < पूजन में अवश्य करें।  ٧ ٩٧ ٧٥ Valn' दक्षिणमुखी दीपक (f Jlfik  ٥٢٢  धूप दीप का आध्यात्मिक संदेश सामान्य देवकायन नजिन एव ढानिकारक धूप एवं दीप केचल कर्मकापड नहीं , अपितु शुद्धि, माना गया ढ। ईश्वरीय चेतना के प्रकाश ज्ञान एकाग्ता नथा पितृकार्य में निवकार्य गें शास्त्रोक्त विधि से अर्पित धूप दीप  प्रतीक हे पूर्व या उत्तरमुखी दक्षिणमुखी पूजा को अधिक सात्विक , प्रभावशाली एवं दीपक रखें। दीपक रखें। फलदायी बनाते ह। ऊँ दीपज्योतिः परं ब्रह्म ऊँ धूपन्दोप का 35 शास्त्रीय महत्व एवं दीपक की दिशा-विधि Yrl दीपज्योतिः परं ब्रह्म, दीपज्योतिर्जनार्दनः II तमसो मा ज्योतिर्गमय। ऊँ " हे प्रभु ! हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। शास्त्रीय निष्कर्ष दीपक की दिशा का महत्व दीपक को सीधे भूमि पर न रखें। दीपो धनदः स्यादुङमुखः प्राइमुखो आयुः हानिदो दक्षिणामुखः II प्रत्यङमुखो दुःखदोडसौ  दीपक को पात्र, दीपाधार अथवा  अक्षत पर स्थापित करें । दीपक उत्तरमुखी दीपक भूमि से कम से कम समद्धि एवं থন फाम सेफम अंगुल ऊपर हो। चार মামাদম সনান JVFk 471 কানা देवता के दाहिने घृतदीप  பபபபசி तथा तैलदीप बाई ओर रखें। N पूर्वमुखी दीपक दीपक देवकार्य में पूर्व या उत्तररमुखी दीपक रखें।  आयु. आराग्य Tu wd W पवतज पितृकार्य में दक्षिणमुखी दीपक रखें । দানমিকামনং সলাচ का कारण m  ' दीप दोनों का प्रयोग  সানাোঘাঃ धूप एवं < पूजन में अवश्य करें।  ٧ ٩٧ ٧٥ Valn' दक्षिणमुखी दीपक (f Jlfik  ٥٢٢  धूप दीप का आध्यात्मिक संदेश सामान्य देवकायन नजिन एव ढानिकारक धूप एवं दीप केचल कर्मकापड नहीं , अपितु शुद्धि, माना गया ढ। ईश्वरीय चेतना के प्रकाश ज्ञान एकाग्ता नथा पितृकार्य में निवकार्य गें शास्त्रोक्त विधि से अर्पित धूप दीप  प्रतीक हे पूर्व या उत्तरमुखी दक्षिणमुखी पूजा को अधिक सात्विक , प्रभावशाली एवं दीपक रखें। दीपक रखें। फलदायी बनाते ह। ऊँ दीपज्योतिः परं ब्रह्म ऊँ - ShareChat