"फेम की भूख या ममता का कत्ल? अपनी ही फूल जैसी बेटियों को 'प्रोडक्ट' बनाना बंद करें!"
आजकल की दिखावे वाली दुनिया में हद तो तब हो गई जब मां-बाप ही अपनी 7-8 साल की बच्चियों को स्टेरॉयड और हार्मोन के इंजेक्शन लगवा रहे हैं। कसूर उन रील वाली एक्ट्रेस और सोशल मीडिया के 'फेक' ग्लैमर का है, जिसे देखकर शहरों के पढ़े-लिखे लोग अंधे हो गए हैं। सिर्फ चंद रील, कुछ लाइक्स और 'यूनिक' दिखने की सनक में आप उनकी मासूमियत को वक्त से पहले ही मार रहे हैं।
आज भी गांव की वो 8 साल की बच्ची जिसे आप 'पिछड़ा' कहते हैं, वो अपनी गुड़ियों के साथ खेलती एक प्यारी सी बच्ची ही है। लेकिन शहरों में? वहां तो उसे जबरदस्ती 'जवान' और 'मैच्योर' दिखाया जा रहा है ताकि दुनिया उसे देखे। याद रखिये, ये कुदरत के साथ खिलवाड़ नहीं, अपनी ही औलाद के साथ किया जा रहा सबसे बड़ा गुनाह है।
बॉलीवुड और रील की इस नकली दुनिया को अपनी असल जिंदगी मत बनाइए। अपनी बेटी को एक 'स्टार' बनाने की होड़ में उसकी सेहत और उसका बचपन मत छीिनये। कहीं ऐसा न हो कि सोशल मीडिया के इस फेम के चक्कर में, कल को आपको अपनी ही बेटी की खराब सेहत पर आंसू बहाने पड़ें।
दिखावा छोड़िए, इंसान बनिए और अपनी बच्ची को बच्ची ही रहने दीजिये! #ram ram


