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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 #💌शब्द से शायरी✒️ #✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - ८८ जरा ये धुप ढ़ल जाए, तो हाल पूछेंगे , यहाँ कुछ साये, खुद को खुदा बताते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार ४ ८८ जरा ये धुप ढ़ल जाए, तो हाल पूछेंगे , यहाँ कुछ साये, खुद को खुदा बताते है। अभ्युदय साहित्य गुलज़ार ४ - ShareChat