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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - ग़ज़ल महकी में घुली शर्करा  महकी তুনা  डराने लगी है फिज़ा  महकी। महकी ख़यालों में मां की सदा जाविदा है करे रूह को तर दुआ महकी महकी। हरारत में उसने शरारत जो कर दी तभी से लगे ये दवा महकी महकी।  हक़ीक़त की बाबत का अंदाज़ सबको महकी। है सूरत  पे बाद-ए शबा महकी है शिशु गृह जो नौनिहालों के ख़ातिर रवायत बना दी सज़ा महकी महकी। से अनबन मज़ा लेते मौसम का बूंदों  ஈகி करेगा मुसाफ़िर गिला महकी = "उमा " गीत ग़ज़लों में हमदम मिलेंगे किताबों में रख दी जुबा महकी महकी। -ওমা লম্রনণী ग़ज़ल महकी में घुली शर्करा  महकी তুনা  डराने लगी है फिज़ा  महकी। महकी ख़यालों में मां की सदा जाविदा है करे रूह को तर दुआ महकी महकी। हरारत में उसने शरारत जो कर दी तभी से लगे ये दवा महकी महकी।  हक़ीक़त की बाबत का अंदाज़ सबको महकी। है सूरत  पे बाद-ए शबा महकी है शिशु गृह जो नौनिहालों के ख़ातिर रवायत बना दी सज़ा महकी महकी। से अनबन मज़ा लेते मौसम का बूंदों  ஈகி करेगा मुसाफ़िर गिला महकी = "उमा " गीत ग़ज़लों में हमदम मिलेंगे किताबों में रख दी जुबा महकी महकी। -ওমা লম্রনণী - ShareChat