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#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - झूंठ कहते हैं लोग कि संगत का हो जाता है असर , काँटों को आज तक महकने का सलीका नहीं आया !! झूंठ कहते हैं लोग कि संगत का हो जाता है असर , काँटों को आज तक महकने का सलीका नहीं आया !! - ShareChat