ShareChat
click to see wallet page
search
#जीवन की सच्ची बातें
जीवन की सच्ची बातें - पिंजरे में बंद शेर को रोज दस किलो मांस डाला जाता था। एक दिन उसे सिर्फ एक किलो मांस डाला में आ गया। वह जोर जोर से दहाड़ने गया। तो शेर गुस्से लगा। पिंजरे से अपना सर टकराने लगा। पिंजरे की ग्रिल्स को मुंह में दबाकर तोड़ने की कोशिश करने लगा| इससे वह बहुत ज्यादा जख्मी हो गया और मर गया। शेर को भूख ने नहीं मारा था। उसे अचानक आई कमी ने मारा था। साइकोलॉजी में इसे एक्मेक्टेशन गैप इफेक्ट कहते है। जब इंसान बहुत ज्यादा पाने का आदी हो जाता है तो छोटी सी कमी भी उसे जुल्म लगने लगती है। रोज फायदा उठाते हैं। एक दिन तुम मना जो लोग तुमसे दुश्मन बन जाएगें। क्योंकि लोग फ्री में ব্রংতীl নী বী तुम्हारे को अपनी निजी संपत्ति मान लेते है। मिल रहरी सुविधा पिंजरे में बंद शेर को रोज दस किलो मांस डाला जाता था। एक दिन उसे सिर्फ एक किलो मांस डाला में आ गया। वह जोर जोर से दहाड़ने गया। तो शेर गुस्से लगा। पिंजरे से अपना सर टकराने लगा। पिंजरे की ग्रिल्स को मुंह में दबाकर तोड़ने की कोशिश करने लगा| इससे वह बहुत ज्यादा जख्मी हो गया और मर गया। शेर को भूख ने नहीं मारा था। उसे अचानक आई कमी ने मारा था। साइकोलॉजी में इसे एक्मेक्टेशन गैप इफेक्ट कहते है। जब इंसान बहुत ज्यादा पाने का आदी हो जाता है तो छोटी सी कमी भी उसे जुल्म लगने लगती है। रोज फायदा उठाते हैं। एक दिन तुम मना जो लोग तुमसे दुश्मन बन जाएगें। क्योंकि लोग फ्री में ব্রংতীl নী বী तुम्हारे को अपनी निजी संपत्ति मान लेते है। मिल रहरी सुविधा - ShareChat