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#🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋 #🕋सुन्नी इस्लामिक ग्रुप🕋 #🕋जुम्मा मुबारक🤲 #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🕌 मक्का मदीना 🤲
🕋❀◕❀मेरा प्यारा इस्लाम❀◕❀🕋 - क्या मस्जिद के इमाम हक बोलने से डरते हैं  ম নম্ভূন ] सारे मस्जिद के इमाम ऐसे हैं आज की वक्त जो या तो खामोश रहते हैं या तो सिर्फ नमाज रोजा वगैरा के बारे में बताते रहते हैं। उन्हें समाज में चल रही रासुमात से कोई मतलब नहीं है, बल्कि वह हर रस्मि মিম্সা লন ই, ওনব লিয নী সিদ্ধ ಹar # बखुशी वक्त में खाना मिल जाए और महीना में तनखा मिल जाए उतना ही काफी है। हालांकि इमाम तो रहबर होता है और रहबर के जिम्मेदारी सिर्फ खाना खाना और तनखा लेना नहीं होता , यह तो नौकर का काम है। चुके इमाम दिनी रहबर है तो उनकी जिम्मेदारी यह है कि मोहल्ला में होने वाली हर रासुमात के खिलाफ खड़े हो, लोगों को हक नाहक के बारे में बताएं, अल्लाह के ऊपर भरोसा रखें , गुलाम बनकर ना रहे बल्कि एक रहबर बनकर जिंदगी गुजारे क्या मस्जिद के इमाम हक बोलने से डरते हैं  ম নম্ভূন ] सारे मस्जिद के इमाम ऐसे हैं आज की वक्त जो या तो खामोश रहते हैं या तो सिर्फ नमाज रोजा वगैरा के बारे में बताते रहते हैं। उन्हें समाज में चल रही रासुमात से कोई मतलब नहीं है, बल्कि वह हर रस्मि মিম্সা লন ই, ওনব লিয নী সিদ্ধ ಹar # बखुशी वक्त में खाना मिल जाए और महीना में तनखा मिल जाए उतना ही काफी है। हालांकि इमाम तो रहबर होता है और रहबर के जिम्मेदारी सिर्फ खाना खाना और तनखा लेना नहीं होता , यह तो नौकर का काम है। चुके इमाम दिनी रहबर है तो उनकी जिम्मेदारी यह है कि मोहल्ला में होने वाली हर रासुमात के खिलाफ खड़े हो, लोगों को हक नाहक के बारे में बताएं, अल्लाह के ऊपर भरोसा रखें , गुलाम बनकर ना रहे बल्कि एक रहबर बनकर जिंदगी गुजारे - ShareChat