#♥️कुछ अनकही~सी बातें,,कुछ सुलझी हुई सोच~कुछ दिल तक ~कुछ हमारे अल्फाजों तक♥️[]_रश्मिदत्ता_बिहारी_किलर #💕 "लफ्ज़" कुछ तेरे....कुछ मेरे.... 💘 R #🧿🧚♀️🎯❣️अल्फाजों की दुनियां जहाँ _सिर्फ तुम हो_नये ज़ज्बात_नये_अल्फाज के साथ _{लव शायरी}❣️🎯🧚♀️ #💕दिल की💕बात 💕दिल से💕दिल तक💕अल्फाज ए मुहब्बत 💕( आर-दत्ता)😘😟 #✍️ साहित्य एवं शायरी
![♥️कुछ अनकही~सी बातें,,कुछ सुलझी हुई सोच~कुछ दिल तक ~कुछ हमारे अल्फाजों तक♥️[]_रश्मिदत्ता_बिहारी_किलर - मेरी मर्जी पर कहां तेरा इश्क चलता है एक अरमान है तू जो बस मेरे दिल में पलता है खुदा से मांग भी लूं तुझको करके इबादत उसकी इश्क़ पर कहां लेकिन किसी का जोर चलता है कैसा जबरदस्ती से जो हासिल हो फिर वो इश्क इसे खरीद नहीं सकता न धन न ही पैसा मिले जो खुद से तो खुशनसीबी है मगर होता है कितनो का ही नसीब ऐसा तेरा इश्क़ मेरी रूह में पल रहा है तू नहीं संग पर मेरी सांसों में घुल रहा है भी सब्र में हूं तुझे सोचकर मै तू दूर है तो तू हक़ीक़त में न सही मुझे ख़्वाबों में मिल रहा है। 7620<ae मेरी मर्जी पर कहां तेरा इश्क चलता है एक अरमान है तू जो बस मेरे दिल में पलता है खुदा से मांग भी लूं तुझको करके इबादत उसकी इश्क़ पर कहां लेकिन किसी का जोर चलता है कैसा जबरदस्ती से जो हासिल हो फिर वो इश्क इसे खरीद नहीं सकता न धन न ही पैसा मिले जो खुद से तो खुशनसीबी है मगर होता है कितनो का ही नसीब ऐसा तेरा इश्क़ मेरी रूह में पल रहा है तू नहीं संग पर मेरी सांसों में घुल रहा है भी सब्र में हूं तुझे सोचकर मै तू दूर है तो तू हक़ीक़त में न सही मुझे ख़्वाबों में मिल रहा है। 7620<ae - ShareChat ♥️कुछ अनकही~सी बातें,,कुछ सुलझी हुई सोच~कुछ दिल तक ~कुछ हमारे अल्फाजों तक♥️[]_रश्मिदत्ता_बिहारी_किलर - मेरी मर्जी पर कहां तेरा इश्क चलता है एक अरमान है तू जो बस मेरे दिल में पलता है खुदा से मांग भी लूं तुझको करके इबादत उसकी इश्क़ पर कहां लेकिन किसी का जोर चलता है कैसा जबरदस्ती से जो हासिल हो फिर वो इश्क इसे खरीद नहीं सकता न धन न ही पैसा मिले जो खुद से तो खुशनसीबी है मगर होता है कितनो का ही नसीब ऐसा तेरा इश्क़ मेरी रूह में पल रहा है तू नहीं संग पर मेरी सांसों में घुल रहा है भी सब्र में हूं तुझे सोचकर मै तू दूर है तो तू हक़ीक़त में न सही मुझे ख़्वाबों में मिल रहा है। 7620<ae मेरी मर्जी पर कहां तेरा इश्क चलता है एक अरमान है तू जो बस मेरे दिल में पलता है खुदा से मांग भी लूं तुझको करके इबादत उसकी इश्क़ पर कहां लेकिन किसी का जोर चलता है कैसा जबरदस्ती से जो हासिल हो फिर वो इश्क इसे खरीद नहीं सकता न धन न ही पैसा मिले जो खुद से तो खुशनसीबी है मगर होता है कितनो का ही नसीब ऐसा तेरा इश्क़ मेरी रूह में पल रहा है तू नहीं संग पर मेरी सांसों में घुल रहा है भी सब्र में हूं तुझे सोचकर मै तू दूर है तो तू हक़ीक़त में न सही मुझे ख़्वाबों में मिल रहा है। 7620<ae - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_53689_be371cc_1779346052071_sc.jpg?tenant=sc&referrer=pwa-sharechat-service&f=071_sc.jpg)

