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जय श्री राम #latest
latest - যাম জবুনি || Il9 6 श्री राम चंद्र कृपालु भजमन , हरण भाव भय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुखकर , कंज पद कन्जारुणम्। | कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।  पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्। । भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।  रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्। । सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं | आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर धूषणं। ।  इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्। मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।  मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों ।  सिलू  करुना निधान सुजान सनेहू जानत रावरो।।  एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।  भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली। ।  तुलसी  सोरठा जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।  मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे। | Panotbookcom যাম জবুনি || Il9 6 श्री राम चंद्र कृपालु भजमन , हरण भाव भय दारुणम्। नवकंज लोचन कंज मुखकर , कंज पद कन्जारुणम्। | कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।  पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्। । भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।  रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्। । सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं | आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर धूषणं। ।  इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्। मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।  मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों ।  सिलू  करुना निधान सुजान सनेहू जानत रावरो।।  एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।  भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली। ।  तुलसी  सोरठा जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।  मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे। | Panotbookcom - ShareChat