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वक़्त को ठोकर लगाता आदमी, गिर रहा है आता-जाता आदमी। है नहीं पता रास्ते का क्या करे, कश्मकश में छटपटाता आदमी। #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #कविता
👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 - वक़्त को ठोकर लगाता आदमी, गिर रहा है आतान्जाता आदमी॰ कुछ पता नहीं रारते का क्या करे, कश्मकश में छटपटाता आदमी॰ वक़्त को ठोकर लगाता आदमी, गिर रहा है आतान्जाता आदमी॰ कुछ पता नहीं रारते का क्या करे, कश्मकश में छटपटाता आदमी॰ - ShareChat