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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - जब मैंने, स्वयं को चुना, मैंने स्वयं को॰ हर बंधन से स्वतंत्र पाया। जैसे बिना तीर्थ मुक्ति धाम पाया! मैंने, स्वयं को चुना, जब मैंने अपने भीतर के कोलाहल को शांत पाया। व्यर्थ के सवाल को ओझल पाया। अंधकार से भरे मन को, उज्ज्वल पाया। जब मैंने स्वयं को चुना, 344 44 41 असीम एवम स्वयं को परिपूर्ण पाया। जब मैंने, स्वयं को चुना, मैंने स्वयं को॰ हर बंधन से स्वतंत्र पाया। जैसे बिना तीर्थ मुक्ति धाम पाया! मैंने, स्वयं को चुना, जब मैंने अपने भीतर के कोलाहल को शांत पाया। व्यर्थ के सवाल को ओझल पाया। अंधकार से भरे मन को, उज्ज्वल पाया। जब मैंने स्वयं को चुना, 344 44 41 असीम एवम स्वयं को परिपूर्ण पाया। - ShareChat