जिंदगी जैसे-जैसे बढ़ रही है
मेरी खुद से मुहब्बत बढ़ रही है
ख्वाहिशें धीरे-धीरे कम हो रही है
लोगों से संवाद थोड़े कम हुए हैं
कई आदतें मुझसे अब बिछड़ रही हैं
चाय का एक कप ,एकांत सुकून देने लगा है किताबों पर आशिकी ज्यादा उमड़ रही है
रोती नहीं हूं अब छोटी बातों पर मैं
सहन करने की शक्ति बढ़ रही है
दिल के तारों ने छेड़ा है अपना राग
गजल कोई मधुर ,सुहानी लग रही है
खुद को अब तवज्जों दे रही हूं
बाकी सब तो दुनियादारी लग रही है ।
#❣️Love you ज़िंदगी ❣️ #🌙 गुड नाईट
#💓 मोहब्बत दिल से #नारी का आत्म सम्मान 🙏 #सेल्फ रिस्पेक्ट //*///
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