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#जय श्री कृष्णा राधे राधे
जय श्री कृष्णा राधे राधे - 0 ನ 0` प्रगाढ़ प्रेम E 0 जो कभी संसार की ओर ताकता है और ओर, कभी परमात्मा की 6 वह पूरा प्रेमी नहीं है। उसको अभी भगवत्- प्रेम की प्रबल उत्कण्ठा 1 76 संसार रहे या हुयी। जाय, घर उजड़े या बसे, किसी बात की परवाह नहीं; परन्तु प्रेम में कोई बाधा न आवे! शिशु  को मारती है तो भी माता यदि छोटे 4 वह उसी की गोद में घुसता है और यदि वह पुचकारती है तब भी वह उसी के पास रहता है माता की गोद को छोड़कर को और कहीं TqTg 9 चैन नहीं पड़ता। इसी प्रकार भक्त को भी अपने भगवान् को छोड़कर और कहीं विश्राम नहीं मिलता। चाहे वह मारे चाहे प्यार करे ! भक्त एक क्षण भी उसके बिना रहना नहीं चाहता | 1 a 4 जय जय श्री राधे श्रीजी की चरण सेवा 0 ನ 0` प्रगाढ़ प्रेम E 0 जो कभी संसार की ओर ताकता है और ओर, कभी परमात्मा की 6 वह पूरा प्रेमी नहीं है। उसको अभी भगवत्- प्रेम की प्रबल उत्कण्ठा 1 76 संसार रहे या हुयी। जाय, घर उजड़े या बसे, किसी बात की परवाह नहीं; परन्तु प्रेम में कोई बाधा न आवे! शिशु  को मारती है तो भी माता यदि छोटे 4 वह उसी की गोद में घुसता है और यदि वह पुचकारती है तब भी वह उसी के पास रहता है माता की गोद को छोड़कर को और कहीं TqTg 9 चैन नहीं पड़ता। इसी प्रकार भक्त को भी अपने भगवान् को छोड़कर और कहीं विश्राम नहीं मिलता। चाहे वह मारे चाहे प्यार करे ! भक्त एक क्षण भी उसके बिना रहना नहीं चाहता | 1 a 4 जय जय श्री राधे श्रीजी की चरण सेवा - ShareChat