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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ४७ कराड़ का मालिक वृद्धाश्रम में ये कहानी उनके लिए है जो पैसा कमाने मे लगे है। जिन्होंने पैसा बटोरने मे खुद को भुला रखा है। श्रीनाथ खंडेलवाल जो ८० करोड़ की सम्पति के मालिक थे। ४०० "किताबे लिखी। पदम श्री पुरस्कार से सम्मानित हुए। मगर नियति का खेल देखिये। अंत समय मे अपनो का कांधा भी नही मिला, अनाथो की तरह वृद्धाश्रम में अंतिम सांस ली। बेटी सुप्रीम कोर्ट मे वकील, बेटा कनाडा मे उद्योगपति। दोनों के पास बाप के अंतिम संस्कार के लिए भी वक़्त न था। यह घटना भी वहाँ की है जहाँ हम दो घण्टे बिताकर समझते है हमारे पाप धूल गए। जी हाँ, बनारस के रहने वाले श्रीनाथ जी यतिमो की तरह दुनिया छोड़ कर गए। चन्दा इकट्ठा करके उनका अंतिम संस्कार किया गया। पद, प्रतिष्ठा और पैसा कुछ काम नही आया। अब प्रश्न ये उठता है कि हम किसके लिए इकट्ठा कर रहे है। का दिल दुखा के बेईमानी करके, लोगों हम क्यों बैंक बैलेंस बढ़ाने में लगे है। ४७ कराड़ का मालिक वृद्धाश्रम में ये कहानी उनके लिए है जो पैसा कमाने मे लगे है। जिन्होंने पैसा बटोरने मे खुद को भुला रखा है। श्रीनाथ खंडेलवाल जो ८० करोड़ की सम्पति के मालिक थे। ४०० "किताबे लिखी। पदम श्री पुरस्कार से सम्मानित हुए। मगर नियति का खेल देखिये। अंत समय मे अपनो का कांधा भी नही मिला, अनाथो की तरह वृद्धाश्रम में अंतिम सांस ली। बेटी सुप्रीम कोर्ट मे वकील, बेटा कनाडा मे उद्योगपति। दोनों के पास बाप के अंतिम संस्कार के लिए भी वक़्त न था। यह घटना भी वहाँ की है जहाँ हम दो घण्टे बिताकर समझते है हमारे पाप धूल गए। जी हाँ, बनारस के रहने वाले श्रीनाथ जी यतिमो की तरह दुनिया छोड़ कर गए। चन्दा इकट्ठा करके उनका अंतिम संस्कार किया गया। पद, प्रतिष्ठा और पैसा कुछ काम नही आया। अब प्रश्न ये उठता है कि हम किसके लिए इकट्ठा कर रहे है। का दिल दुखा के बेईमानी करके, लोगों हम क्यों बैंक बैलेंस बढ़ाने में लगे है। - ShareChat