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#❤️अस्सलामु अलैकुम #🌞 Good Morning🌞
❤️अस्सलामु अलैकुम - तेरा अक्स मेरे घर से कहीं जाता नहीं है, तू चाहे कहीं भी होे, मेरे अंदर से कहीं जाता नहीं है। यह कैसा क़ैद है, कैसी इनायत है मेरी , कि तेरा ख़याल पल भर भी कहीं जाता नहीं है। मैंने कोशिश की बहुत, तुझे भूला कर जियूँ, पर तू ही रूह है, रूह तन से कहीं जाती नहीं है। यह दिल भी अजीब है, जो अब तेरा आशियाँ है, यहाँ से कोई मेहमान उठकर कहीं जाता नहीं है। हर गली , हर मोड़ पर महफ़ूज़ रखी है याद तेरी, यह खुश्बू मेरे गुलशन से कभी जाती नहीं है। तेरा अक्स मेरे घर से कहीं जाता नहीं है, तू चाहे कहीं भी होे, मेरे अंदर से कहीं जाता नहीं है। यह कैसा क़ैद है, कैसी इनायत है मेरी , कि तेरा ख़याल पल भर भी कहीं जाता नहीं है। मैंने कोशिश की बहुत, तुझे भूला कर जियूँ, पर तू ही रूह है, रूह तन से कहीं जाती नहीं है। यह दिल भी अजीब है, जो अब तेरा आशियाँ है, यहाँ से कोई मेहमान उठकर कहीं जाता नहीं है। हर गली , हर मोड़ पर महफ़ूज़ रखी है याद तेरी, यह खुश्बू मेरे गुलशन से कभी जाती नहीं है। - ShareChat