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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - कोई मेरे স নমী चाहती अब = 3, 31ಮ मेरी आँखों से बहते पोंछे, मेरे पीड़ित मन को कंधा दे। हूँ, স নী ওন কনল হননা चाहती स्वयं को इतना समर्थ बना लूँ कि अपनी पीड़ाओं और ज़ख्मों के घाव स्वयं भर सकूँ कोई मेरे স নমী चाहती अब = 3, 31ಮ मेरी आँखों से बहते पोंछे, मेरे पीड़ित मन को कंधा दे। हूँ, স নী ওন কনল হননা चाहती स्वयं को इतना समर्थ बना लूँ कि अपनी पीड़ाओं और ज़ख्मों के घाव स्वयं भर सकूँ - ShareChat