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#जीवन की सच्ची बातें
जीवन की सच्ची बातें - व्यक्ति बनकर नहीं बल्कि व्यक्तित्व बनकर जियो क्योकि व्यक्ति एक दिन विदा हो जाता है और व्यक्तित्व हमेंशा जीवित रहता है. हम भी लगाव रखते है मगर बोलते नहीं. क्योंकि हम रिश्ते निभाते है तौलते नहीं. व्यक्ति बनकर नहीं बल्कि व्यक्तित्व बनकर जियो क्योकि व्यक्ति एक दिन विदा हो जाता है और व्यक्तित्व हमेंशा जीवित रहता है. हम भी लगाव रखते है मगर बोलते नहीं. क्योंकि हम रिश्ते निभाते है तौलते नहीं. - ShareChat