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#☝ मेरे विचार #✍मेरे पसंदीदा लेखक
☝ मेरे विचार - नफ़रत के धर्म.... !! किसी भी धर्म या पंथ का मूल उद्देस्य था के बीच प्रेम स्थापित 621 . मनुष्यों पर विडम्बना देखिए - लोगों  ने धर्म के नाम पर किए , ಶ್ किए , क़ल्ल बहाया , 4 किए॰ मंदिर  बचाए, मस्जिद   बचाई, अपने अपने ईश्वर बचाए नहीं बचा सके बस "मनुष्य " के भीतर का प्रेम... !! ~লানান नफ़रत के धर्म.... !! किसी भी धर्म या पंथ का मूल उद्देस्य था के बीच प्रेम स्थापित 621 . मनुष्यों पर विडम्बना देखिए - लोगों  ने धर्म के नाम पर किए , ಶ್ किए , क़ल्ल बहाया , 4 किए॰ मंदिर  बचाए, मस्जिद   बचाई, अपने अपने ईश्वर बचाए नहीं बचा सके बस "मनुष्य " के भीतर का प्रेम... !! ~লানান - ShareChat