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पहाड़ों के बीच बसा एक छोटा सा गाँव था। गाँव के पास एक शांत नदी बहती थी, जिसकी कल-कल आवाज पूरे वातावरण को मधुर बना देती थी। उसी गाँव में एक बूढ़ी दादी अपनी छोटी बेटी गौरी के साथ रहती थी। उनका जीवन बहुत साधारण था, लेकिन वे भगवान Mahadev के बड़े भक्त थे। हर सुबह दादी नदी किनारे बने छोटे शिव मंदिर में दीप जलाती और “ॐ नमः शिवाय” का जाप करती। गौरी भी अपनी माँ के साथ मंदिर जाती और फूल चढ़ाती। गाँव वाले कहते थे कि दादी का विश्वास बहुत सच्चा है, इसलिए महादेव हमेशा उनकी रक्षा करते हैं। एक वर्ष गाँव में भयंकर सूखा पड़ गया। नदी का पानी कम होने लगा और खेत सूख गए। लोग परेशान हो गए। दादी ने गाँव वालों से कहा, “विश्वास रखो, महादेव हमारी सहायता करेंगे।” लेकिन कुछ लोग उनकी बात पर हँसने लगे। उस रात दादी और गौरी मंदिर में बैठकर प्रार्थना करने लगे। अचानक तेज हवा चली और मंदिर की घंटियाँ अपने आप बजने लगीं। गौरी ने देखा कि शिवलिंग के पास एक प्रकाश चमक रहा है। तभी एक साधु वहाँ प्रकट हुए। उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “सच्ची भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती।” साधु ने दादी को नदी के पास एक पुरानी चट्टान हटाने को कहा। अगले दिन गाँव वालों ने मिलकर चट्टान हटाई, तो उसके नीचे से मीठे पानी का झरना फूट पड़ा। धीरे-धीरे नदी फिर से भर गई और गाँव में हरियाली लौट आई। जब लोग साधु को धन्यवाद देने मंदिर पहुँचे, तो वहाँ कोई नहीं था। दादी मुस्कुराई और बोली, “वो साधु नहीं, स्वयं महादेव थे।” #har har mahadev #आओ चले शिव की ओर। #🌙 गुड नाईट
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