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#🙏प्रातः वंदन
🙏प्रातः वंदन - dRQU} सूर्य जय गगनु प्रांगण के अधिपति तेज पुंज प्रचंड हो काल चुक्र के नियंता तुम सत्य ्अटल अखंड हो सहस्त्र रश्मि हस्त् फैला तिमिर - वंश विदारते अंधकार के गर्भ से नव सृष्टि को उभारते ১১১১ as n dRQU} सूर्य जय गगनु प्रांगण के अधिपति तेज पुंज प्रचंड हो काल चुक्र के नियंता तुम सत्य ्अटल अखंड हो सहस्त्र रश्मि हस्त् फैला तिमिर - वंश विदारते अंधकार के गर्भ से नव सृष्टि को उभारते ১১১১ as n - ShareChat