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#❤️जीवन की सीख #🙏 प्रेरणादायक विचार #👉 लोगों के लिए सीख👈 #📒 मेरी डायरी #🌸 सत्य वचन
❤️जीवन की सीख - अज्ञानवस या बेहोशी में अगर जानवरों वाली हरकतें मूर्खताएं करोगें अगर तो निसंदेह अपने आप को गटर नर्क में ही पाओगे फिर मत चिल्लाना कि मेरी ज़िंदगी गटर सी नर्क सी क्यों बनी है। साहब जी जानवर वही पाये जाते है। / महलों मे नहीं नाले में कीचड़ मे ही नाले में शुकून असली सुवरो को पाया जाता है। भाई साहब जी मिलता है,आप इंसान हो नहीं मिलेगा सुकन आपको नालो में लेटने से,इंसान रहते हुये जानवरो वाली हरकतें मतलब अशांति।तो साफ सा़फ जान लेना कि अगर जीवन में अशांति है,तो हरकतें जरूर जानवरों वाली की होंगी,या तो अज्ञानवस, या बेहोसी में।और अज्ञान भी हटाया जा सकता है,और बेहोशी भी बस अंधे स्वार्थो का त्याग करना पड़ता है, चेतना होगी तो चुनाव ठीक ही करेगी , और नहीं होगी तो गटर ज़िंदाबाद | अंधी चाहते अंधी कामनाएं और अंधे स्वार्थ, और अहंकार ही दुःख को जन्म, मतलब गटर में धकेलता है। आज नहीं तो कल अवश्य आपको नहीं तो आपके वंश को।ये अटल नियम है।अंधेरा अंधेरे को ही गले लगा सकता है, और रोशनी रोशनी को। रोशनी में इतनी जान होती है,कि अंधेरा डरता है,रोशनी को गले लगाने से॰क्योंकि अँधेरा मिट जाता है, रोशनी के सम्पर्क में आते ही। तो ये जो बोलते है ना कि दो जिस्म एक जान,ये रोशनी और रोशनी वाले रिश्तों पर लागू होता नियम ना कि रोशनी और अंधेरे वाले रिश्तो पर,इनको तो दूर दूर रहने पड़ेगा वरना एक साथ होते ही अंधेरे को मिटना पड़ेगा, तब जाकर होंगे ये भी दो जिस्म और एक जान वरना कभी नहीं, पाखंड करते रहेंगे। अज्ञानवस या बेहोशी में अगर जानवरों वाली हरकतें मूर्खताएं करोगें अगर तो निसंदेह अपने आप को गटर नर्क में ही पाओगे फिर मत चिल्लाना कि मेरी ज़िंदगी गटर सी नर्क सी क्यों बनी है। साहब जी जानवर वही पाये जाते है। / महलों मे नहीं नाले में कीचड़ मे ही नाले में शुकून असली सुवरो को पाया जाता है। भाई साहब जी मिलता है,आप इंसान हो नहीं मिलेगा सुकन आपको नालो में लेटने से,इंसान रहते हुये जानवरो वाली हरकतें मतलब अशांति।तो साफ सा़फ जान लेना कि अगर जीवन में अशांति है,तो हरकतें जरूर जानवरों वाली की होंगी,या तो अज्ञानवस, या बेहोसी में।और अज्ञान भी हटाया जा सकता है,और बेहोशी भी बस अंधे स्वार्थो का त्याग करना पड़ता है, चेतना होगी तो चुनाव ठीक ही करेगी , और नहीं होगी तो गटर ज़िंदाबाद | अंधी चाहते अंधी कामनाएं और अंधे स्वार्थ, और अहंकार ही दुःख को जन्म, मतलब गटर में धकेलता है। आज नहीं तो कल अवश्य आपको नहीं तो आपके वंश को।ये अटल नियम है।अंधेरा अंधेरे को ही गले लगा सकता है, और रोशनी रोशनी को। रोशनी में इतनी जान होती है,कि अंधेरा डरता है,रोशनी को गले लगाने से॰क्योंकि अँधेरा मिट जाता है, रोशनी के सम्पर्क में आते ही। तो ये जो बोलते है ना कि दो जिस्म एक जान,ये रोशनी और रोशनी वाले रिश्तों पर लागू होता नियम ना कि रोशनी और अंधेरे वाले रिश्तो पर,इनको तो दूर दूर रहने पड़ेगा वरना एक साथ होते ही अंधेरे को मिटना पड़ेगा, तब जाकर होंगे ये भी दो जिस्म और एक जान वरना कभी नहीं, पाखंड करते रहेंगे। - ShareChat