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#🖋ग़ालिब की शायरी #🌞 Good Morning🌞 #👍स्पेशल शायरी🖋 #💝 शायराना इश्क़
🖋ग़ालिब की शायरी - अगर महबूब की याद न हो आँख में , तो जागने का मज़ा क्या है। न आँसू की लकीरें हों गाल पर, तो सजने का मज़ा क्या है। हर साँस में शामिल हो उसकी ख़ुशबू , तभी तो ज़िंदगी है ज़िंदगी , दिल जो n उसके नाम पे, तड़पे तो धड़कने का मज़ा क्या है। अगर महबूब की याद न हो आँख में , तो जागने का मज़ा क्या है। न आँसू की लकीरें हों गाल पर, तो सजने का मज़ा क्या है। हर साँस में शामिल हो उसकी ख़ुशबू , तभी तो ज़िंदगी है ज़िंदगी , दिल जो n उसके नाम पे, तड़पे तो धड़कने का मज़ा क्या है। - ShareChat