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#📝कविता / शायरी/ चारोळी #🖋शेरो-शायरी
📝कविता / शायरी/ चारोळी - लिए एक शायरी है.. বুঙ্কাই ٤٨ ٤٨ ٢7٩ गए, दूर हा वक्त के आगे सब मजबूर हो गए रिश्तों में हमने ऐसी चोट खाई, हम बेवफा और सब बेकसूर हो गए.. ! ! लिए एक शायरी है.. বুঙ্কাই ٤٨ ٤٨ ٢7٩ गए, दूर हा वक्त के आगे सब मजबूर हो गए रिश्तों में हमने ऐसी चोट खाई, हम बेवफा और सब बेकसूर हो गए.. ! ! - ShareChat