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#जिम्मेदारी *लोग कब बेहोश होते हैं ?🙄* नोटबंदी हो तो लोग बेहोश हो जाते हैं! SIR लागू हो तो लोग बेहोश हो जाते हैं! सिलेंडर लेने की लाइन लगे तो लोग बेहोश हो जाते हैं! परंतु एक लाइन ऐसी भी है, जहाँ खड़े लोग कभी बेहोश नहीं होते! *वह लाइन है!—* जहाँ हर महीने Free का राशन मिलता है, जहाँ Free का इलाज मिलता है, जहाँ Free का गैस कनेक्शन मिलता है, जहाँ Free का घर मिलता है, जहाँ Free का SIM मिलता है, जहाँ Free की छात्रवृत्ति और शिक्षा मिलती है, और कई जगह तो Free का खाना भी मिलता है। *अजीब बात है…* देश में जो चीजें मुफ्त मिलती हैं, वहाँ भीड़ हमेशा मजबूत और स्वस्थ रहती है, लेकिन जहाँ जिम्मेदारी, नियम या भुगतान की बात आती है, वहीं अचानक लोगों को चक्कर आने लगते हैं..... शायद यही हमारे समय का सबसे बड़ा सामाजिक-राजनीतिक व्यंग्य है!— *“अधिकार” की लाइन में भीड़ बढ़ती जा रही है,..और “कर्तव्य” की लाइन में लोग बेहोश होते जा रहे हैं!...* *संकट के समय देश का बिपक्ष देश बिरोधी गतिविधियों में लिप्त हो चुका है, गूहयुद्ध, दंगे फसाद करवाने पर तुले हुए हैं* *मगर देश वासियों को समझ आने लगी है क्या सही और क्या गलत है* 🙏🙏🙏🚩🚩🚩