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क्या यह सही कहावत है #❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - यह दोनों कहावतें गलत हैं धोबी का कुत्त्ता नहीं कुतका होता है। जिससे धोबी कपड़े धोते थे, यह बहुत भारी होता इसलिए इसे घर नहीं लाया जाता था॰ ना ही बीच में कहीं छुपा दिया घाट पर छोड़ा जाता था। इसलिए कहावत बनी जाता था। धोबी का कुतका ना घर का ना घाट काम जिसे लोगों ने अपभ्रंश करके कुतका की जगह कुत्ता कर दिया। @देशी किसान की मेहनत अकल बड़ी या भैंस नहीं व्यस होता है एक संस्कृत शब्द है जिसका "व्यस' अर्थ है "उम्र  | इसलिए कहावत का अर्थ है "बुद्धि बड़ी या उम्र" | आज तक हम लोग गलत कहावत बोलते आ रहे थे यह दोनों कहावतें गलत हैं धोबी का कुत्त्ता नहीं कुतका होता है। जिससे धोबी कपड़े धोते थे, यह बहुत भारी होता इसलिए इसे घर नहीं लाया जाता था॰ ना ही बीच में कहीं छुपा दिया घाट पर छोड़ा जाता था। इसलिए कहावत बनी जाता था। धोबी का कुतका ना घर का ना घाट काम जिसे लोगों ने अपभ्रंश करके कुतका की जगह कुत्ता कर दिया। @देशी किसान की मेहनत अकल बड़ी या भैंस नहीं व्यस होता है एक संस्कृत शब्द है जिसका "व्यस' अर्थ है "उम्र  | इसलिए कहावत का अर्थ है "बुद्धि बड़ी या उम्र" | आज तक हम लोग गलत कहावत बोलते आ रहे थे - ShareChat