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जय सर्वजन समाज जय हिन्द जय भारत वंदेमातरम। #आर्द्रा नक्षत्र
आर्द्रा नक्षत्र - जय श्री सीताराम 30 30 आद्रा नक्षत्र में सूर्य प्रवेश दिनांक २२ जून २०२६, सोमवार ೆ೦ బ్ద్ रात्रि 8:27 নরতী २२ जून से सूर्य देव आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे तथा जुलाई २०२६ तक रहेगी यह अवधि 6 वैदिक ज्योतिष एवं हिंदू पंचांग के अनुसार आद्रा नक्षत्र को वर्षा ऋतु ( मानसून) के आगमन का प्रमुख संकेत माना जाता है। इस काल में सूर्य देव मिथुन राशि में स्थित रहते हैं। प्रकृति में नवजीवन , ऊर्जा एवं परिवर्तन का यह विशेष समय माना जाता है। की शुरुआत कृषि ? ೦ सूर्य आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब ऐसी मान्यता है कि ula धरती माता रजस्वला होती हैं। अतः यह समय बीज बोने, खेती अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है। लिए प्रारम्भ करने तथा कृषि कार्यौं के శీ सांस्कृतिक प्रम्पीरमनछठु  बिहार  आद्रा नक्षत्र के स्वागत एवं उत्तम एवं झारखंड क्षेत्र में खीर, पूडी, आम तथा जामुन का भोग लगाने की प्राचीन परम्परा प्रचलित हे। परिवार एवं समाज गें मंगलकामना के साथ यह उत्सव मनाया जाता ह। ५ ज्योतिषीय महत्व ५ आद्रा नक्षत्र के अधिदेवता भगवान रूद्र (भगवान शिव ) तथा स्वामी ग्रह राहु माने गए हें। यह नक्षप्र प्रकृति में परिवर्तन इसके  দুনভমিবতা  प्रतीक माना जाता  निवीन सूजन, शक्ति एवं जीवन के 'chl यह अवधि साधना, जप, तप, शिव आराधना एवं प्रकृति के प्रति व्यक्त करने काभी श्रेष्ठ अवसर ह। कृतजता  के जीवन में सुख, समूद्धि, उत्तम भगवान रूद्र की कृपा से सभी स्वास्थ्य एवं गंगलमय वर्षा का आगगन हो। हर हर महादेव सीताराम जयश्री ೬3  मिट्रूटू आचार्य शास्त्री सुजीत 0 बाबा समस्त बैदिक यज्ञ अनुष्ठान एवं कर्मकाण्ड विशेषज्ञ  बान्थू भगवानपुर, वैशाली  संपर्क सूत्र : ९५2585955२ आवास जय श्री सीताराम 30 30 आद्रा नक्षत्र में सूर्य प्रवेश दिनांक २२ जून २०२६, सोमवार ೆ೦ బ్ద్ रात्रि 8:27 নরতী २२ जून से सूर्य देव आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे तथा जुलाई २०२६ तक रहेगी यह अवधि 6 वैदिक ज्योतिष एवं हिंदू पंचांग के अनुसार आद्रा नक्षत्र को वर्षा ऋतु ( मानसून) के आगमन का प्रमुख संकेत माना जाता है। इस काल में सूर्य देव मिथुन राशि में स्थित रहते हैं। प्रकृति में नवजीवन , ऊर्जा एवं परिवर्तन का यह विशेष समय माना जाता है। की शुरुआत कृषि ? ೦ सूर्य आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब ऐसी मान्यता है कि ula धरती माता रजस्वला होती हैं। अतः यह समय बीज बोने, खेती अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है। लिए प्रारम्भ करने तथा कृषि कार्यौं के శీ सांस्कृतिक प्रम्पीरमनछठु  बिहार  आद्रा नक्षत्र के स्वागत एवं उत्तम एवं झारखंड क्षेत्र में खीर, पूडी, आम तथा जामुन का भोग लगाने की प्राचीन परम्परा प्रचलित हे। परिवार एवं समाज गें मंगलकामना के साथ यह उत्सव मनाया जाता ह। ५ ज्योतिषीय महत्व ५ आद्रा नक्षत्र के अधिदेवता भगवान रूद्र (भगवान शिव ) तथा स्वामी ग्रह राहु माने गए हें। यह नक्षप्र प्रकृति में परिवर्तन इसके  দুনভমিবতা  प्रतीक माना जाता  निवीन सूजन, शक्ति एवं जीवन के 'chl यह अवधि साधना, जप, तप, शिव आराधना एवं प्रकृति के प्रति व्यक्त करने काभी श्रेष्ठ अवसर ह। कृतजता  के जीवन में सुख, समूद्धि, उत्तम भगवान रूद्र की कृपा से सभी स्वास्थ्य एवं गंगलमय वर्षा का आगगन हो। हर हर महादेव सीताराम जयश्री ೬3  मिट्रूटू आचार्य शास्त्री सुजीत 0 बाबा समस्त बैदिक यज्ञ अनुष्ठान एवं कर्मकाण्ड विशेषज्ञ  बान्थू भगवानपुर, वैशाली  संपर्क सूत्र : ९५2585955२ आवास - ShareChat