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कौन सा घर🥺... #कविता #🌞सुप्रभात सन्देश #📖 कविता और कोट्स✒️ #📒 मेरी डायरी #🌸 सत्य वचन
कविता - शीर्षकःकौन साघर? सब कहते हैं - थकजाओतो घरलौटजाना, वहाँ सुकूँ मिलेगा, चैन काकोईठिकाना। पूछता है, आखिर... कौन सा घर? परमन वहघर, जहाँ हरबात एकरणभूमि बनजाती है, जहाँ प्रेम भी चीखकर अपनी उपस्थिति जताती है? जहाँमौन रहनाभी एकगुनाह मानलिया जाता है, और सुबहकी ताजी हवाओं में भी भारीपन घुलजाता है? जहाँ अपनों नेहीसिखायाकि रोना कमज़ोरीकी निशानी है, औरघुट -घुट कर जीनाही असल ज़िंदगानी है? सबकहते हैं अपनों का साथही घरहोता है, अपनों के बीचही अकेलापन रोता है? परतबक्याकर जब मैंडरती हूँ, कहीं मैं भी वैसी हीनबनजाऊँ  अपनीही आवाज़ मेंजबउनका लहज़ा पाती हूँ,तो सहम जाती हूँ। वही जज़्बातछुपाने की आदत, वही दर्ददेने का ढंग, जो कसमें खाई थीं न दोहरानेकी, आजवही हैंमेरेसंग। নী সন নুসচী ননাঙী- कौन साघर?' वह, जहाँ लोग मेरेनाम केहैं, ,जहाँ मैं खुद स्वयंकीहूँ यावह ' बसएकऐसा ही आशियाना ढूँढते हैं शायदहमसबताउम जहाँ दीवारेंनहों, बस मैं औरमेरा सुकून हो। तोबताओ... " कौन सा घर?' शीर्षकःकौन साघर? सब कहते हैं - थकजाओतो घरलौटजाना, वहाँ सुकूँ मिलेगा, चैन काकोईठिकाना। पूछता है, आखिर... कौन सा घर? परमन वहघर, जहाँ हरबात एकरणभूमि बनजाती है, जहाँ प्रेम भी चीखकर अपनी उपस्थिति जताती है? जहाँमौन रहनाभी एकगुनाह मानलिया जाता है, और सुबहकी ताजी हवाओं में भी भारीपन घुलजाता है? जहाँ अपनों नेहीसिखायाकि रोना कमज़ोरीकी निशानी है, औरघुट -घुट कर जीनाही असल ज़िंदगानी है? सबकहते हैं अपनों का साथही घरहोता है, अपनों के बीचही अकेलापन रोता है? परतबक्याकर जब मैंडरती हूँ, कहीं मैं भी वैसी हीनबनजाऊँ  अपनीही आवाज़ मेंजबउनका लहज़ा पाती हूँ,तो सहम जाती हूँ। वही जज़्बातछुपाने की आदत, वही दर्ददेने का ढंग, जो कसमें खाई थीं न दोहरानेकी, आजवही हैंमेरेसंग। নী সন নুসচী ননাঙী- कौन साघर?' वह, जहाँ लोग मेरेनाम केहैं, ,जहाँ मैं खुद स्वयंकीहूँ यावह ' बसएकऐसा ही आशियाना ढूँढते हैं शायदहमसबताउम जहाँ दीवारेंनहों, बस मैं औरमेरा सुकून हो। तोबताओ... " कौन सा घर?' - ShareChat