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#❤️अस्सलामु अलैकुम
❤️अस्सलामु अलैकुम - रिज़्क़ की असली हक़ीक़त १) इंसान चाहे जितनी कोशिश कर ले, रिज़्क़ देने वाली ज़ात सिर्फ़ अल्लाह की है। २) अल्लाह वही है जो नदियों और समंदरों में भी अपने बंदों का R؛؟5 पहुँचाता है। ३) इंसान हिसाब लगाता रहता है, वहाँ से आता है जहाँ रिज़्क़ मगर उसने सोचा भी नहीं होता। रिज़्क़ की असली हक़ीक़त १) इंसान चाहे जितनी कोशिश कर ले, रिज़्क़ देने वाली ज़ात सिर्फ़ अल्लाह की है। २) अल्लाह वही है जो नदियों और समंदरों में भी अपने बंदों का R؛؟5 पहुँचाता है। ३) इंसान हिसाब लगाता रहता है, वहाँ से आता है जहाँ रिज़्क़ मगर उसने सोचा भी नहीं होता। - ShareChat