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#दर्द भरी शायरी
दर्द भरी शायरी - मार कर छोड़ दिया, गलती का वजह भी नहीं बताया. हम पूछते रह गए कसूर अपना, और उसने खामोशी को ही जवाब बनाया. মীব্ধা; ना इल्ज़ाम मिला , ना सफाई का बस सज़ा सुना दी बिना किसी खता के. अजीब इंसाफ था उसके प्यार का, जहाँ हम ही गुनहगार थे हर दफा के. मार कर छोड़ दिया, गलती का वजह भी नहीं बताया. हम पूछते रह गए कसूर अपना, और उसने खामोशी को ही जवाब बनाया. মীব্ধা; ना इल्ज़ाम मिला , ना सफाई का बस सज़ा सुना दी बिना किसी खता के. अजीब इंसाफ था उसके प्यार का, जहाँ हम ही गुनहगार थे हर दफा के. - ShareChat