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#⏳शब्द से शायरी: वक़्त
⏳शब्द से शायरी: वक़्त - காகிரத #, दिया, आज को कुर्बान कर लिए, जो जीना था खुद के उसे `कल' के नाम कर दिया। मुट्ठी तो बंद थी हमारी  q, वक्त फिर भी निकल गया, মলীক্ধা মীস্ত্রন ম টািনযী ೫6 खुद ज़िंदगी का ही दम निकल गया। காகிரத #, दिया, आज को कुर्बान कर लिए, जो जीना था खुद के उसे `कल' के नाम कर दिया। मुट्ठी तो बंद थी हमारी  q, वक्त फिर भी निकल गया, মলীক্ধা মীস্ত্রন ম টািনযী ೫6 खुद ज़िंदगी का ही दम निकल गया। - ShareChat