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#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - बनती मिटती 8 ক্ষ্ী   তী है ত্ুনিযা ज़रूर ٦؟ % ٦3 ೯ कोई   न কীৎ তাফয हैं लोग जा के फिर नहीं   कभी जाते সান कोई 8 दीवार $ बस्ती उधर ర मुमकिन नहीं कि दर्द-ए-मोहब्बत अयाँ न हो खिलती 8 ೯ কলী   নী महकती जब তাফয हुए   कि जानते पिघलना 8 ಶ भर I ತ೩   ೯ का जिगर है कि जलती ये शम्अ नागिन ही जानिए उसे है जिस का नाम दुनिया ম है आस्तीं পালিত डसती लाख তফয जाँ दे के भी ख़रीदो तो दुनिया সাৎ হাথ न ঠ   মুংন-T-স্রাক कहने  को सस्ती है ज़रूर बनती मिटती 8 ক্ষ্ী   তী है ত্ুনিযা ज़रूर ٦؟ % ٦3 ೯ कोई   न কীৎ তাফয हैं लोग जा के फिर नहीं   कभी जाते সান कोई 8 दीवार $ बस्ती उधर ర मुमकिन नहीं कि दर्द-ए-मोहब्बत अयाँ न हो खिलती 8 ೯ কলী   নী महकती जब তাফয हुए   कि जानते पिघलना 8 ಶ भर I ತ೩   ೯ का जिगर है कि जलती ये शम्अ नागिन ही जानिए उसे है जिस का नाम दुनिया ম है आस्तीं পালিত डसती लाख তফয जाँ दे के भी ख़रीदो तो दुनिया সাৎ হাথ न ঠ   মুংন-T-স্রাক कहने  को सस्ती है ज़रूर - ShareChat