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#📚कविता-कहानी संग्रह
📚कविता-कहानी संग्रह - टूट के चा ऐसा लगा रहा है जैसे ये दूसरा जनम 87 बहुत अरसे से हूं संजीदा , फिर से मुझको पागल भीगा दे दिल की सुखी ज़मीं, सिर पे ऐसे  बादल   ख़ूबीयों में साथ देना आकर्षण है ख़ामियों में साथ ঠনা मोहब्बत ೯ | मेरे अच्छे कर्मों का फल भुगत रहा 8# कई सालों से बस कांटों पे चल रहा 8#/ जिसको 8 #18 ब्बत मिल जाए उसको ख़ुदा | टूट के चा ऐसा लगा रहा है जैसे ये दूसरा जनम 87 बहुत अरसे से हूं संजीदा , फिर से मुझको पागल भीगा दे दिल की सुखी ज़मीं, सिर पे ऐसे  बादल   ख़ूबीयों में साथ देना आकर्षण है ख़ामियों में साथ ঠনা मोहब्बत ೯ | मेरे अच्छे कर्मों का फल भुगत रहा 8# कई सालों से बस कांटों पे चल रहा 8#/ जिसको 8 #18 ब्बत मिल जाए उसको ख़ुदा | - ShareChat