sn vyas
#कर्म #कर्म ही पूजा है #श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक ॐ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏💐श्रीमद्भागवत गीता💐🙏 bhagwat geeta
🙏🙏🛐ॐ श्री परमात्मने नमः🛐🙏🙏
🙏कर्म का सिद्धांत पुस्तक से 🙏
#भाग_३९/२
मुझे कर्म भी नहीं करना है और फल भी नहीं भोगना है:
गतांक से आगे
*मैं अर्जुन के सारथी का काम कर रहा हूं तो मुझे इससे कुछ मिलने वाला नहीं है। मैं जो काम कर रहा हूं , वह करूं या ना करूं तो भी मेरे आनंद में कोई घट-बढ नहीं होने वाली है। फिर भी मैं लोक संग्रह को दृष्टि में रखकर काम करता हूं। अगर भगवान श्री कृष्ण स्नान, संध्या , देव पूजा आदि नहीं करेंगे तो जगत के लोग भी ऐसे कर्मों से विमुख हो जाएंगे।*
*भगवान ने इस बात को गीता में स्पष्ट रूप से कहा है।*
*महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों के बीच हुआ था । उस समय भगवान श्री कृष्ण द्वारका में बैठे-बैठे आराम करते और मौज मस्ती करते तो क्या हर्ज था ? पांडवों के जीतने से श्रीकृष्ण को किसी गांव और जागीर या कोई अन्य इनाम नहीं मिलने वाला था ।*
*कौरवों की जीत होती तो भगवान श्री कृष्ण को द्वारका की गद्दी पर कोई आंच भी नहीं आने वाली थी । फिर भी भगवान श्रीकृष्ण क्यों बेकार में इस उपाधि में पड़े और उन्होंने द्वारका से कुरुक्षेत्र तक प्रयाण करने का कष्ट क्यों उठाया ? द्वारका में बैठकर आराम नहीं कर सकते थे ? लेकिन नहीं ,, जब धर्म युद्ध हो रहा हो तब भगवान श्री कृष्ण जैसे योगीश्वर और कर्मयोगी बैठे रह कर केवल देखते नहीं रह सकते।*
क्रमश: ✍🏽