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कोई मजबूर होता है ,कोई मगरूर होता है , कोई मजलूम तो कोई नशे से चूर होता है । ये खुद्दारों की दुनिया है, सभी को अपनी चिन्ता है , किसी को अपने आगे यूँ कहाँ मंजूर होता है ॥ #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #👍📝 हिन्दी साहित्य 💐🌹 अधूरे अल्फाज 🌺 #कविता #📚कविता-कहानी संग्रह
❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 - कोई मजबूर होता है ,कोई मगरूर होता है कोई मजलूम तो कोई नशें से चूर होता है। खुद्दारों की दुनिया है, सभी को अपनी चिन्ता है , 4 किसी को अपने आगे यूँ कहाँ मंजूर होता है II कोई मजबूर होता है ,कोई मगरूर होता है कोई मजलूम तो कोई नशें से चूर होता है। खुद्दारों की दुनिया है, सभी को अपनी चिन्ता है , 4 किसी को अपने आगे यूँ कहाँ मंजूर होता है II - ShareChat